

🕉️ सद्गुरु स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज की छत्तीसगढ़ यात्रा संपन्न
भक्ति, प्रेम और आत्मज्ञान का प्रसार — बिलासपुर में श्री प्रेम प्रकाश आश्रम का उद्घाटन, अवतरण दिवस उत्सव भी मनाया गया
रायपुर। श्री प्रेम प्रकाश मण्डलाध्यक्ष सद्गुरु स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज के सानिध्य में पूज्य संत मंडली की छत्तीसगढ़ यात्रा 29 सितम्बर से 11 अक्टूबर तक संपन्न हुई। इस दौरान मंडली ने राजनांदगांव, धमतरी, बालोद, दल्लीराजहरा, बिलासपुर, कोरबा, भाटापारा और रायपुर में प्रवास करते हुए सत्संग, भजन और प्रवचन के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ईश्वर प्रेम, सेवा, सिमरन और सदाचार के माध्यम से आत्म जागरण का संदेश देना रहा। सद्गुरु महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि “ईश्वर न्यायकारी है, उसके यहां कर्मों का सटीक लेखा-जोखा होता है। पाप कर्म का फल दुःख और पुण्य कर्म का फल सुख होता है, इसलिए मनुष्य को शुभ विचारों से मन को उज्ज्वल बनाना चाहिए।”
भक्तों को अज्ञान से जाग्रत करने और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए सद्गुरु महाराज ने आत्मबल पहचानने का सरल मार्ग बताया। संत मंडली ने राम नाम की धुनी और गुरु भजनों की मधुर प्रस्तुति से हर शहर को भक्ति में सराबोर कर दिया।
अवतरण दिवस पर गूंजे भजन, छत्तीसगढ़ बना भाग्यशाली स्थल
इस यात्रा की विशेषता रही कि द्वितीय पीठाधीश्वर तपोमूर्ति सद्गुरु स्वामी सर्वानंद जी महाराज का 129वां अवतरण दिवस भी इसी अवधि में आया। सद्गुरु स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज ने इस अवसर पर स्वयं की रचित रचना “खुशी अजु छाई आ, आ वरी वाधाई आ…” भजन प्रस्तुत कर भक्तों को आनंदित किया।
हर शहर में इस पावन दिन को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया।
बिलासपुर में श्री प्रेम प्रकाश आश्रम का भव्य उद्घाटन
2 अक्टूबर को बिलासपुर में नवनिर्मित श्री प्रेम प्रकाश आश्रम का उद्घाटन एवं मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा का पावन कार्यक्रम भी सद्गुरु महाराज और पूज्य संत मंडली के कर-कमलों से संपन्न हुआ।
प्रेम, शांति और भक्ति का संदेश
पूरी यात्रा के दौरान सद्गुरु महाराज ने भजनों और प्रवचनों के माध्यम से बताया कि प्रेम से ही सदाचार, सेवा, सिमरन और परोपकार संभव है। उन्होंने कहा कि संत वही हैं जो चंदन समान शीतलता और पारस समान प्रेरणा देते हैं।
इस प्रकार यह पावन यात्रा भक्ति, प्रेम, आत्मज्ञान और मानवता के संदेश के साथ छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर अध्यात्मिक चेतना की अमिट छाप छोड़ गई



