राजधानी को ट्रिपल इंजन नहीं, फुल ब्रेक लग गया! निगम का 272 करोड़ हक का पैसा सरकार दबाए बैठी है और महापौर मौन हैं।
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छोटे वार्ड काम को तरस रहे, ठेकेदारों की दिवाली अंधेरे में – नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी

बाबाजी न्यूज़ रायपुर — रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि राजधानी की जनता ने महापौर जी और उनकी परिषद को ट्रिपल इंजन की सरकार के नाम पर वोट दिया था कि विकास तेज होगा, लेकिन आज स्थिति यह है कि रायपुर नगर निगम अपनी ही सरकार से अपना हक का पैसा लेने में भीख मांगने की स्थिति में आ गया है।
क्या राजधानी वासियों ने इसलिए महापौर को चुना था कि निगम आर्थिक बदहाली के दौर से गुजरे?
आज 70 वार्डों में हालात यह हैं कि छोटे-छोटे नाली, सड़क, लाइट के काम के लिए पार्षदों को अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बड़े कार्यों के लिए अधिकारियों के पास न समय है न फंड। ठेकेदार जो कंधे से कंधा मिलाकर निगम के साथ चलते हैं, उनके घर इस दिवाली दिया जलेगा या नहीं, यह भी सवाल बन गया है।
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने आंकड़ों के साथ बताया कि रायपुर नगर निगम का करोड़ों रुपया राज्य सरकार के पास अटका पड़ा है, और महापौर की उदासीनता के कारण वह राशि निगम को आवंटित नहीं हो रही है।
रायपुर नगर निगम को राज्य सरकार से लेना है अपना हक का पैसा – 272.13 करोड़ रुपये
- मुद्रांक शुल्क (Stamp Duty) मद – 226.00 करोड़ रुपये
- आबकारी / बार लाइसेंस मद – 39.00 करोड़ रुपये
- चुंगी कर क्षतिपूर्ति मद – 3.35 करोड़ रुपये
- संधारण / क्षतिपूर्ति मद – 3.78 करोड़ रुपये
कुल राशि = 272 करोड़ 13 लाख रुपये
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सवाल उठाया –
- क्या इतनी बड़ी राशि की जरूरत रायपुर निगम को नहीं है?
- क्या महापौर जी अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री जी और नगरीय प्रशासन मंत्री जी से अपना हक मांगने में कमजोर साबित हो रही हैं?
- क्या भारतीय जनता पार्टी की छत्तीसगढ़ सरकार अपनी ही पार्टी की रायपुर निगम परिषद के साथ भेदभाव कर रही है?
- निगम में भी भाजपा, प्रदेश में भी भाजपा, केंद्र में भी भाजपा – फिर भी पैसों के लिए दर-दर क्यों?
रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि जब हक का पैसा ही नहीं मिलेगा तो सरकार आए दिन जनता पर नया टैक्स और नए आदेश थोप कर वसूली करेगी, जिसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ेगा।
ट्रिपल इंजन की सरकार में रायपुर नगर निगम का यह वित्तीय संकट आज तक के इतिहास में नहीं देखा गया। त्योहार के समय में निगम की यह बदहाली दुर्भाग्यजनक है। इसका जवाब महापौर जी को राजधानी की जनता को देना होगा।


